खर्राघाट

खर्राघाट:

मुंगेली खर्राघाट आगर नदी के किनारे महादेव का सिद्ध मंदिर है। यहाँ 1890 में शैव संप्रदाय के सिद्ध महात्मा शिवोपासक आए और यहाँ की भूमि में उन्हें शांति अनुभूति हुई। श्री खर्राघाट महादेव गणेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्धि रखता है। तत्कालीन समय में अघोर साधुओं का तपोस्थली रहा है। खर्राघाट तंत्र सिद्धि के लिए मशहूर था। आज भी गोरखनाथ संप्रदाय के शिष्यों का दर्शन यहाँ अनिवार्य माना जाता है। वहीं दूसरे तट पर नागा संप्रदाय के श्री हंस बाबा की समाधि स्थल परमहंस कुटीर में विद्यमान है। महाशिवरात्रि के साथ ही अन्य विशेष पर्व के अवसर पर इस जगह में एक ख़ासी सुगंध फैल जाती है। खर्राघाट के एक तट का नाम बाबा बुड़ान है, जो आज भी रहस्य बना हुआ है। वर्तमान में इस स्थान को जिला प्रशासन ने पर्यटन स्थल के रूप मे सँवारने का निर्णय लिया है। यह जिला मुख्यालय मुंगेली से 2 किमी दक्षिण पूर्व दिशा पर स्थित ग्राम रामगढ़ के करीब स्थित है।

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  • खर्राघाट मुंगेली

कैसे पहुंचें:

ट्रेन द्वारा

बिलासपुर रेलवे स्टेशन से 56 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है मुंगेली विकासखंड तक सड़क मार्ग से जुड़ा है।

सड़क के द्वारा

यह जिला मुख्यालय मुंगेली से 02 किमी दूर दक्षिण पूर्व की दिशा रामगढ़ में स्थित है